साईं बाबा के अनमोल वचन

sai anmol vachan

Quote 1: Why fear when I am here?

In Hindi :मेरे रहते डर कैसा?

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 2: I am formless and everywhere.

In Hindi :मैं निराकार हूँ और सर्वत्र हूँ.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 3: I am in everything and beyond. I fill all space.

In Hindi :मैं हर एक वस्तु में हूँ और उससे परे भी. मैं सभी रिक्त स्थान को भरता हूँ.

 Sai Baba साईं बाबा 

Quote 4: All that you see taken together is Myself.

In Hindi :आप जो कुछ भी देखते हैं उसका संग्रह हूँ मैं.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 5: I do not shake or move.

In Hindi :मैं डगमगाता या हिलता नहीं हूँ.

 Sai Baba साईं बाबा 

Quote 6: If one devotes their entire time to me and rests in me, need fear nothing for body and soul.

In Hindi :यदि कोई अपना पूरा समय मुझमें लगाता है और मेरी शरण में आता है तो उसे अपने शरीर या आत्मा के लिए कोई भय नहीं होना चाहिए.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 7: If one sees me and me alone and listens to my Leelas and is devoted to me alone, they will reach God.

In Hindi :यदि कोई सिर्फ और सिर्फ मुझको देखता है और मेरी लीलाओं को सुनता है और खुद को सिर्फ मुझमें समर्पित करता है तो वह भगवान तक पंहुच जायेगा.

 Sai Baba साईं बाबा

Quote 8: My business is to give blessings.

In Hindi :मेरा काम आशीर्वाद देना है.

 Sai Baba साईं बाबा 

Quote 9: I get angry with none. Will a mother get angry with her children? Will the ocean send back the waters to the several rivers?

In Hindi :मैं किसी पर क्रोधित नहीं होता. क्या माँ अपने बच्चों से नाराज हो सकती है ? क्या समुद्र अपना जल वापस नदियों में भेज सकता है ?

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 10: I will take you to the end.

In Hindi :मैं तुम्हे अंत तक ले जाऊंगा.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 11: Surrender completely to God.

In Hindi :पूर्ण रूप से ईश्वर में समर्पित हो जाइये.

 Sai Baba साईं बाबा 

Quote 12: If you make me the sole object of your thoughts and aims, you will gain the supreme goal.

In Hindi :यदि तुम मुझे अपने विचारों और उद्देश्य की एकमात्र वस्तु रक्खोगे , तो तुम सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करोगे.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 13: Trust in the Guru fully. That is the only sadhana.

In Hindi: अपने गुरु में पूर्ण रूप से विश्वास करें. यही साधना है.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 14: I am the slave of my devotee.

In Hindi :मैं अपने भक्त का दास हूँ.

 Sai Baba साईं बाबा 

Quote 15: Stay by me and keep quiet. I will do the rest.

In Hindi :मेरी शरण में रहिये और शांत रहिये. मैं बाकी सब कर दूंगा.

 Sai Baba साईं बाबा 

Quote 16: What is our duty? To behave properly. That is enough.

In Hindi :हमारा कर्तव्य क्या है? ठीक से व्यवहार करना. ये काफी है.

 Sai Baba साईं बाबा 

Quote 17: My eye is ever on those who love me.

In Hindi :मेरी दृष्टि हमेशा उनपर रहती है जो मुझे प्रेम करते हैं.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 18: Whatever you do, wherever you may be, always bear this in mind: I am always aware of everything you do.

In Hindi :तुम जो भी करते हो, तुम चाहे जहाँ भी हो, हमेशा इस बात को याद रखो: मुझे हमेशा इस बात का ज्ञान रहता है कि तुम क्या कर रहे हो.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 19: I will not allow my devotees to come to harm.

In Hindi :मैं अपने भक्तों का अनिष्ट नहीं होने दूंगा.

Sai Baba साईं बाबा 

Quote 20: If a devotee is about to fall, I stretch out my hands to support him or her.

In Hindi :अगर मेरा भक्त गिरने वाला होता है तो मैं अपने हाथ बढ़ा कर उसे सहारा देता हूँ.

 Sai Baba साईं बाबा 

Quote 21: I think of my people day and night. I say their names over and over.

In Hindi : मैं अपने लोगों के बारे में दिन रात सोचता हूँ. मैं बार-बार उनके नाम लेता हूँ.

Sai Baba साईं बाबा

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छठ पूजा (Chhath Puja)

chath puja

सूर्य षष्टी महात्मय (Surya Sasthi Mahatmya)

भगवान सूर्य जिन्हें आदित्य भी कहा जाता है वास्तव एक मात्र प्रत्यक्ष देवता हैं. इनकी रोशनी से ही प्रकृति में जीवन चक्र चलता है. इनकी किरणों से ही धरती में प्राण का संचार होता है और फल, फूल, अनाज, अंड और शुक्र का निर्माण होता है. यही वर्षा का आकर्षण करते हैं और ऋतु चक्र को चलाते हैं. भगवान सूर्य की इस अपार कृपा के लिए श्रद्धा पूर्वक समर्पण और पूजा उनके प्रति कृतज्ञता को दर्शाता है. सूर्य षष्टी या छठ व्रत इन्हीं आदित्य सूर्य भगवान को समर्पित है (Surya Shasti Chat pooja). इस महापर्व में सूर्य नारायण के साथ देवी षष्टी की पूजा भी होती है. दोनों ही दृष्टि से इस पर्व की अलग अलग कथा एवं महात्मय है. सबसे पहले आप षष्टी देवी की कथा सुनिये.

छठ व्रत कथा (Chat Vrat Katha):

एक थे राजा प्रियव्रत उनकी पत्नी थी मालिनी. राजा रानी नि:संतान होने से बहुत दु:खी थे. उन्होंने महर्षि कश्यप से पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया. यज्ञ के प्रभाव से मालिनी गर्भवती हुई परंतु न महीने बाद जब उन्होंने बालक को जन्म दिया तो वह मृत पैदा हुआ. प्रियव्रत इस से अत्यंत दु:खी हुए और आत्म हत्या करने हेतु तत्पर हुए.

प्रियव्रत जैसे ही आत्महत्या करने वाले थे उसी समय एक देवी वहां प्रकट हुईं. देवी ने कहा प्रियव्रत मैं षष्टी देवी हूं. मेरी पूजा आराधना से पुत्र की प्राप्ति होती है, मैं सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण करने वाली हूं. अत: तुम मेरी पूजा करो तुम्हे पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी. राजा ने देवी की आज्ञा मान कर कार्तिक शुक्ल षष्टी तिथि को देवी षष्टी की पूजा की जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई. इस दिन से ही छठ व्रत का अनुष्ठान चला आ रहा है.

एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान श्रीरामचन्द्र जी जब अयोध्या लटकर आये तब राजतिलक के पश्चात उन्होंने माता सीता के साथ कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को सूर्य देवता की व्रतोपासना की और उस दिन से जनसामान्य में यह पर्व मान्य हो गया और दिनानुदिन इस त्यहार की महत्ता बढ़ती गई व पूर्ण आस्था एवं भक्ति के साथ यह त्यहार मनाया जाने लगा.

छठ व्रत विधि (Chat Vrat Vidhi)

इस त्यहार को बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश एवं भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हर्षोल्लास एवं fनयम निष्ठा के साथ मनाया जाता है. इस त्यहार की यहां बड़ी मान्यता है. इस महापर्व में देवी षष्ठी माता एवं भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए स्त्री और पुरूष दोनों ही व्रत रखते हैं. व्रत चर दिनो का होता है पहले दिन यानी चतुर्थी को आत्म शुद्धि हेतु व्रत करने वाले केवल अरवा खाते हैं यानी शुद्ध आहार लेते हैं. पंचमी के दिन नहा खा होता है यानी स्नान करके पूजा पाठ करके संध्या काल में गुड़ और नये चावल से खीर बनाकर फल और मिष्टान से छठी माता की पूजा की जाती है फिर व्रत करने वाले कुमारी कन्याओं को एवं ब्रह्मणों को भोजन करवाकर इसी खीर को प्रसाद के तर पर खाते हैं. षष्टी के दिन घर में पवित्रता एवं शुद्धता के साथ उत्तम पकवान बनाये जाते हैं. संध्या  के समय पकवानों को बड़े बडे बांस के डालों में भरकर जलाशय के निकट यानी नदी, तालाब, सरोवर पर ले जाया जाता है. इन जलाशयों में ईख का घर बनाकर उनपर दीया जालाया जाता है.

व्रत करने वाले जल में स्नान कर इन डालों को उठाकर डूबते सूर्य एवं षष्टी माता को आर्घ्य देते हैं. सूर्यास्त के पश्चात लोग अपने अपने घर वापस आ जाते हैं. रात भर जागरण किया जाता है. सप्तमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पुन: संध्या काल की तरह डालों में पकवान, नारियल, केला, मिठाई भर कर नदी तट पर लोग जमा होते हैं. व्रत करने वाले सुबह के समय उगते सूर्य को आर्घ्य देते हैं. अंकुरित चना हाथ में लेकर षष्ठी व्रत की कथा कही और सुनी जाती है. कथा के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है और फिर सभी अपने अपने घर लट आते हैं. व्रत करने वाले इस दिन परायण करते हैं.

इस पर्व के विषय में मान्यता यह है कि जो भी षष्टी माता और सूर्य देव से इस दिन मांगा जाता है वह मुराद पूरी होती है. इस अवसर पर मुराद पूरी होने पर बहुत से लोग सूर्य देव को दंडवत प्रणाम करते हैं. सूर्य को दंडवत प्रणाम करने का व्रत बहुत ही कठिन होता है, लोग अपने घर में कुल देवी या देवता को प्रणाम कर नदी तट तक दंड देते हुए जाते हैं. दंड की प्रक्रिया इस प्रकार से है पहले सीघे खडे होकर सूर्य देव को प्रणाम किया जाता है फिर पेट की ओर से ज़मीन पर लेटकर दाहिने हाथ से ज़मीन पर एक रेखा खींची जाती है. यही प्रक्रिया नदी तट तक पहुंचने तक बार बार दुहरायी जाती है.

सुन्दर कांड पाठ (Sundar Kand Path)

1. पंचम सोपान-मंगलाचरण

श्लोक :

* शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्‌।
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं
वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्‌॥1॥

भावार्थ:-शान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाणों से परे), निष्पाप, मोक्षरूप परमशान्ति देने वाले, ब्रह्मा, शम्भु और शेषजी से निरंतर सेवित, वेदान्त के द्वारा जानने योग्य, सर्वव्यापक, देवताओं में सबसे बड़े, माया से मनुष्य रूप में दिखने वाले, समस्त पापों को हरने वाले, करुणा की खान, रघुकुल में श्रेष्ठ तथा राजाओं के शिरोमणि राम कहलाने वाले जगदीश्वर की मैं वंदना करता हूँ॥1॥

* नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये
सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा।
भक्तिं प्रयच्छ रघुपुंगव निर्भरां मे
कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च॥2॥

भावार्थ:-हे रघुनाथजी! मैं सत्य कहता हूँ और फिर आप सबके अंतरात्मा ही हैं (सब जानते ही हैं) कि मेरे हृदय में दूसरी कोई इच्छा नहीं है। हे रघुकुलश्रेष्ठ! मुझे अपनी निर्भरा (पूर्ण) भक्ति दीजिए और मेरे मन को काम आदि दोषों से रहित कीजिए॥2॥

* अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥3॥

भावार्थ:-अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन (को ध्वंस करने) के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान्‌जी को मैं प्रणाम करता हूँ॥3